भारतीय भाषाओं द्वारा ज्ञान

Knowledge through Indian Languages

Dictionary

सृंगी

पुं.

शिव, महादेव।
संज्ञा
(सं. श्रृंगी)

सृंगी

पुं.

एक प्राचीन ऋषि जिनके शाप से परीक्षित को तक्षक नाग ने काटा था।
संज्ञा
(सं. श्रृंगी)
उ.- रिषि समाधि महँ त्यौंही रहयौ। सृंगी रिषि सौं लरिकन कहयौ। ¨¨¨। नृपति दोष कहियै किहिं जाइ। दियौ साप तिहिं तच्छक खाइ-१−२९०।

सृक

पुं.

भाला, शूल।
संज्ञा
(सं.)

सृक

पुं.

तीर, वाण।
संज्ञा
(सं.)

सृक

पुं.

हवा, वायु।
संज्ञा
(सं.)

सृक

पुं.

कमल का फूल।
संज्ञा
(सं.)

सृक

पुं.

हार, माला।
संज्ञा
(सं. स्रज, स्रक)
उ.- (क) सूर परस्पर करत कुलाहल गर सृक (पाठा.- सृग) पहिरावैनी-९−११। (ख) की सृक सीपज की बग-पंगति की मयूर की पीड पखी री-१६२७।

सृकाल

पुं.

सियार।
संज्ञा
(सं. श्रृगाल)

सृक्क, सृक्व

पुं.

ओठों का छोर, मुँह का कोना।
संज्ञा
(सं. सृक्व)

सृग

पुं.

भाला, बरछा।
संज्ञा
(सं. सृक)

सृग

पुं.

तीर, वाण।
संज्ञा
(सं. सृक)

सृग

पुं.

हवा, वायु।
संज्ञा
(सं. सृक)

सृग

पुं.

कमल का फूल।
संज्ञा
(सं. सृक)

सृग

पुं.

हार, गजारा, माला।
संज्ञा
(सं. स्रज, स्रक)
उ.- गर-सृग पहिरावैनी-९−११।

सृगाल

पुं.

सियार, गीदड़।
संज्ञा
(सं. श्रृगाल)
उ.- (क) सिंह कौ भच्छ सृगाल न पावै-९−७९। (ख) आइ सृगाल सिंह बलि चाहत, यह मरजाद जात प्रभु तेरी-९−९३। फिरत सृगाल सज्यौ सव काटत चलत सो सिर लै भागी-९−१५८।

सृगाल

पुं.

धोखेबाज धूर्त।
संज्ञा
(सं. श्रृगाल)

सृगाल

पुं.

डरपोक, कायर।
संज्ञा
(सं. श्रृगाल)

सृगालिका

स्त्री.

गीदड़ी. सियारिन।
संज्ञा
(सं. श्रृगालिका)

सृगालिका

स्त्री.

लोमड़ी।
संज्ञा
(सं. श्रृगालिका)

सृगालिनी, सृगाली

स्त्री.

गीदड़ी।
संज्ञा
(सं. श्रृगाल)

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